तुम्हारे बिना....
कितना बड़ा-सा लगता है
सूनेपन का वह संसार
फ़क़त सुना करता था
जिसे
जाना न था
........अब तक
तुम्हारे बिना....
कितना अधूरा-सा लगता है
मेरा अपना यह संसार
महज सोचा करता था
जिसे
जाना न था
.......अब तक
.........तुम्हारे बिना।
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1 comment:
itni khubsurat kawita...
richa
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