Tuesday, 18 November 2008

तुम्हारे बिना...

तुम्हारे बिना....
कितना बड़ा-सा लगता है
सूनेपन का वह संसार
फ़क़त सुना करता था
जिसे
जाना न था
........अब तक

तुम्हारे बिना....
कितना अधूरा-सा लगता है
मेरा अपना यह संसार
महज सोचा करता था
जिसे
जाना न था
.......अब तक
.........तुम्हारे बिना।

Sunday, 16 November 2008

मामा को संदेश पहुँचा!!

सदियों से भारत के बच्चों को बहलाने वाले चंदा मामा के पास वैज्ञानिकों ने तकनीकी संदेश - 'चंद्रयान' - भेज दिया है...विज्ञानं के लिए उपलब्धि और गर्व का विषय है...बधाई! चलो अब कुछ बरसों बाद मामा की धरती पर घर भी बना लेंगे। लेकिन यह सोच कर अन्दर कहीं टीस भी उठती है कि भविष्य के बच्चों का एक प्रिय खिलौना छिन जाएगा. बच्चों को बहलाने के लिए, दूध-भात खिलाने के लिए माँ तब किसे आवाज देगी??